हर माता-पिता का चाहते है कि उनका बच्चा मन लगाकर पढाई करे और आगे बढ़े । लेकिन बहुत से माता-पिता को इस बात की चिन्ता रहती हैं कि बच्चा पढ़ाई नहीं करता क्या करें । कोई बच्चा मोबाइल में उलझा रहता है, कोई खेल-कूद में, तो किसी का पढ़ाई से बिल्कुल मन ही नहीं लगता। ऐसे में माता पिता को गुस्सा आना स्वाभाविक है बच्चों को डांट-फटकारने से हालात और बिगड़ सकते हैं । इस आर्टिकल में हम विस्तार से समझेंगे कि बच्चों की पढ़ाई में रुचि क्यों कम होती है, इसके पीछे क्या कारण हैं और हम कैसे समझदारी से इस समस्या का समाधान कर सकते हैं।

बच्चा पढ़ाई में मन क्यों नहीं लगाता
बच्चे का पढाई में मन न लगने के कई कारण हो सकते हैं जैसे परीक्षा का डर या किसी विषय में कमजोर होना । इसके अलावा घर का माहौल, माता-पिता के आपसी संबंध, स्कूल का वातावरण और दोस्तों का प्रभाव भी बच्चे की पढ़ाई पर गहरा असर डालते है । इसके अलावा इस बात को भी जानना ज़रूरी है कि हर बच्चा एक जैसा नहीं होता हैं । हर बच्चे की सोचने समझने की शक्ति अलग होती हैं इसलिए कुछ बच्चे जल्दी सीखते हैं और कुछ बच्चों को समय लगता है । कुछ माता-पिता अपने बच्चे की तुलना करने लगते हैं जिससे बच्चे पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है।
माता-पिता की अपेक्षाएं और दबाव
ज्यादातर माता-पिता अपने सपनों को बच्चों के कंधों पर डाल देते हैं । वे चाहते हैं कि बच्चा डॉक्टर बने, इंजीनियर बने या टॉप करे । इस दबाव में बच्चा घुटन महसूस करता है और पढ़ाई से दूरी बनाने लगता है । जब माता-पिता बार-बार कहते हैं कि बच्चा पढ़ाई नहीं करता क्या करें तो असल में उन्हें खुद से भी यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या उनकी अपेक्षाएं बच्चे की क्षमता और रुचि के अनुसार हैं या नहीं ।

मोबाइल और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन
आज के डिजिटल युग में मोबाइल, टीवी और गेम्स बच्चों के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं । घंटों स्क्रीन देखने से बच्चों का ध्यान भटकता है और पढ़ाई बोझ लगने लगती है । माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें लेकिन सख्ती के बजाय समझदारी प्यार से । अगर आप बार-बार सोचते हैं कि बच्चा पढ़ाई नहीं करता क्या करें तो सबसे पहले यह देखें कि बच्चे का ज़्यादातर समय किन चीज़ों में जा रहा है।
पढ़ाई का सही माहौल बनाना
बच्चों के लिए पढ़ाई का माहौल बहुत मायने रखता है । अगर घर में शोर-शराबा है, टीवी लगातार चल रहा है या पढ़ाई के लिए तय जगह नहीं है, तो बच्चे का मन भटकना स्वाभाविक है। एक शांत, साफ और रोशनी वाली जगह बच्चे को पढ़ाई के लिए प्रेरित करती है । जब माता-पिता खुद भी उस समय मोबाइल या टीवी से दूर रहते हैं, तो बच्चा उनसे सीखता है।

डांट-फटकार की जगह संवाद
बच्चा डांटने या मारने से वह सिर्फ स्कूल का काम कर सकता है लेकिन पढ़ाई में मन नहीं लगाएगा। इसके बजाय उससे खुलकर बात करें । बच्चे से पूछे कि पढ़ाई में उसे क्या मुश्किल लगता है, कौन-सी विषय समझ नहीं आती । यही संवाद धीरे-धीरे समाधान की ओर ले जाता है और बच्चा खुलकर पढाई न करने का कारण बता देता हैं ।
नियमित दिनचर्या का महत्व
बच्चों के लिए एक तय दिनचर्या बहुत फायदेमंद होती है । कब उठना है, कब पढ़ना है, कब खेलना है और कब सोना है, यह सब अगर तय हो तो बच्चा मानसिक रूप से संतुलित रहता है । अचानक से लंबे समय तक पढ़ने को कहना बच्चे को चिड़चिड़ा बना देता है । अगर आप सच में चाहते हैं कि पढ़ाई आदत बने तो धीरे-धीरे समय बढ़ाएं । जब माता-पिता सोचते हैं कि बच्चा पढ़ाई नहीं करता क्या करें तो उन्हें दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए।
स्कूल और टीचर से संपर्क
कई बार समस्या घर से ज्यादा स्कूल से जुड़ी होती है । हो सकता है बच्चा किसी टीचर से डरता हो या क्लास में कुछ समझ नहीं पा रहा हो । ऐसे में माता-पिता को स्कूल जाकर टीचर से बात करनी चाहिए । टीचर से बच्चे के व्यवहार, उसकी क्षमता और कमजोरियों के बारे में पूछे ।
पढ़ाई को बोझ नहीं, खेल बनाएं
पढ़ाई हमेशा किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए । कहानियों, उदाहरणों, चार्ट्स और एक्टिविटीज़ के ज़रिए पढ़ाई को रोचक बनाया जा सकता है । जब बच्चा सीखने में मज़ा लेने लगता है तो वह खुद पढ़ने की इच्छा दिखाता है । कई माता-पिता बार-बार कहते हैं कि बच्चा पढ़ाई नहीं करता क्या करें, लेकिन अगर पढ़ाई को रोचक बना दिया जाए, तो यह सवाल अपने-आप कम हो जाता है। more

निष्कर्ष
अगर आपका बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगा रहा है, तो घबराने या गुस्सा करने की ज़रूरत नहीं है। यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है, जिसका समाधान धैर्य, समझ और प्यार से किया जा सकता है । बच्चा पढ़ाई नहीं करता क्या करें इस सवाल का एक ही जवाब नहीं है बल्कि हर बच्चे के अनुसार अलग-अलग होते हैं । सही माहौल, सकारात्मक संवाद और बच्चे की रुचि को समझकर आप धीरे-धीरे उसे पढ़ाई की ओर मोड़ सकते हैं।
माता-पिता के लिए उपयोगी टिप्स
बच्चे के साथ रोज़ थोड़ा समय बिताएं और उसकी बात ध्यान से सुनें। पढ़ाई को सज़ा नहीं, बल्कि सीखने का माध्यम बनाएं। मोबाइल और टीवी का सीमित इस्तेमाल तय करें। बच्चे की मेहनत की सराहना करें, केवल परिणाम की नहीं। ज़रूरत पड़े तो टीचर या काउंसलर की मदद लेने से न हिचकें। याद रखें, हर बच्चा खास है और सही मार्गदर्शन से वह ज़रूर आगे बढ़ सकता है।